आज ज़िंदाबाद है
कल का धन्यवाद है
खुशियों की सौगात है
चिंता की क्या बात है
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Two couplets with different thoughts
तेरे वादे पे एतबार किया
अच्छा किया कि इंतजार किया
Second thought
तेरे वादे पे क्यों एतबार किया
दिल को क्यों फिर शर्मसार किया
इक रात में दो दो चांद खिले वल्लाह क्या नज़ारा था
इक दूर आसमां में थे इक पास में बैठा हमारा था
Another thought
इक रात में दो-दो चाँद खिले अजब सा नूर बरसा था
एक चाँद आसमां पे था और एक रूबरू बैठा था
Another thought
चाँद ने चाँद को देखा तो रात का रंग निखर गया
एक नूर आसमान में था एक दिल में उतर गया
सबके अपने अपने रास्ते सबके अपने अपने ठिकाने
कुछ मंजिल पे पहुंचे कुछ अब भी हैं मुसाफिर पुराने
ज़िन्दगी की किताब में हर किसी के अलग अलग हैं फसाने
सफर में कुछ दूर चलकर क्यों खो जाते हैं जाने पहचाने
वो आ पहुंचे यकबयक बिन बताए हुए
मानो गुजरे दिन लौट आए बिन बुलाए हुए
बचपन से मिलके किसे खुशी नहीं होती
नहीं होती तो बस ये दूरी तय नहीं होती
क्या हुआ कि दो पल भी वो बैठ न पाए
चंद लम्हे ही बहुत हैं दूरियों को भुलाए हुए