Saturday, June 13, 2026

Impromptu

 


आज ज़िंदाबाद है

कल का धन्यवाद है

खुशियों की सौगात है

चिंता की क्या बात है


Thursday, June 11, 2026

ठक ठक

 


ये ठक ठक नहीं ये दस्तक है

मेरे ज़िन्दा होने की हरकत है

Thursday, June 4, 2026

Impromptu

 Two couplets with different thoughts


तेरे वादे पे एतबार किया

अच्छा किया कि इंतजार किया 


Second thought 


तेरे वादे पे क्यों एतबार किया

दिल को क्यों फिर शर्मसार किया

दो दो चांद

 इक रात में दो दो चांद खिले वल्लाह क्या नज़ारा था

इक दूर आसमां में थे इक पास में बैठा हमारा था

Another thought 


इक रात में दो-दो चाँद खिले अजब सा नूर बरसा था

एक चाँद आसमां पे था और एक रूबरू बैठा था


Another thought 

चाँद ने चाँद को देखा तो रात का रंग निखर गया

एक नूर आसमान में था एक दिल में उतर गया

Friday, May 22, 2026

Impromptu


जज़्बात के हैं ये हालात.. कोई मुलाक़ात नहीं है

हर किसी में है कुछ बात... पर कोई बात नहीं है

Monday, May 18, 2026

Impromptu

 सबके अपने अपने रास्ते सबके अपने अपने ठिकाने

कुछ मंजिल पे पहुंचे कुछ अब भी हैं मुसाफिर पुराने

ज़िन्दगी की किताब में हर किसी के अलग अलग हैं फसाने

सफर में कुछ दूर चलकर क्यों खो जाते हैं जाने पहचाने



Friday, April 10, 2026

Impromptu

 वो आ पहुंचे यकबयक बिन बताए हुए

मानो गुजरे दिन लौट आए बिन बुलाए हुए


बचपन से मिलके किसे खुशी नहीं होती

नहीं होती तो  बस ये दूरी तय नहीं होती


क्या हुआ कि दो पल भी वो बैठ न पाए

चंद लम्हे ही बहुत हैं दूरियों को भुलाए हुए

Impromptu