घड़ी के कांटे भी हर घंटे मिलते हैं
दोस्त हैं पर कभी कभी ही मिलते हैं
पर जब भी मिलते हैं लगता है जैसे
सारे फ़ासले पल भर में सिमटते हैं
#friendshipday
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घड़ी के कांटे भी हर घंटे मिलते हैं
दोस्त हैं पर कभी कभी ही मिलते हैं
पर जब भी मिलते हैं लगता है जैसे
सारे फ़ासले पल भर में सिमटते हैं
#friendshipday
यादों की डायरी कुछ यूँ सजा डाली है
लम्हों और यादों की लड़ी बना डाली है
हर पन्ने पर एक मुस्कान बिठा रखी है
हर कोने में एक दास्ताँ छुपा रखी है
कुछ पल हँसी के कुछ आँखों की नमी के
कुछ रंग बचपन के कुछ किस्से ज़िंदगी के
न तारीख़ों का हिसाब न सालों की गिनती है
बस दिल को जो छू गए उन्हीं की बस्ती है
जब भी तन्हा दिल गुज़रे कल को बुलाता है
यादों का कोई पन्ना खुदबखुद खुल जाता है
ये ठक ठक नहीं ये दस्तक है
मेरे ज़िन्दा होने की हरकत है
सोचा आज फिर ख़बर ले ली जाए
अपनों को अपनी ख़बर दे दी जाए
बस इतना बताने चला आया हूँ
की आज भी तुम्हें याद कर पाया हूँ
कभी तुम भी यूं ही दस्तक दे जाना
रिश्तों को यूं ही फिर जिंदा कर जाना
Two couplets with different thoughts
तेरे वादे पे एतबार किया
अच्छा किया कि इंतजार किया
Second thought
तेरे वादे पे क्यों एतबार किया
दिल को क्यों फिर शर्मसार किया
इक रात में दो दो चांद खिले वल्लाह क्या नज़ारा था
इक दूर आसमां में थे इक पास में बैठा हमारा था
Another thought
इक रात में दो-दो चाँद खिले अजब सा नूर बरसा था
एक चाँद आसमां पे था और एक रूबरू बैठा था
Another thought
चाँद ने चाँद को देखा तो रात का रंग निखर गया
एक नूर आसमान में था एक दिल में उतर गया