Thursday, June 4, 2026

दो दो चांद

 इक रात में दो दो चांद खिले वल्लाह क्या नज़ारा था

इक दूर आसमां में थे इक पास में बैठा हमारा था

Another thought 


इक रात में दो-दो चाँद खिले अजब सा नूर बरसा था

एक चाँद आसमां पे था और एक रूबरू बैठा था


Another thought 

चाँद ने चाँद को देखा तो रात का रंग निखर गया

एक नूर आसमान में था एक दिल में उतर गया

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