इक रात में दो दो चांद खिले वल्लाह क्या नज़ारा था
इक दूर आसमां में थे इक पास में बैठा हमारा था
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इक रात में दो-दो चाँद खिले अजब सा नूर बरसा था
एक चाँद आसमां पे था और एक रूबरू बैठा था
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चाँद ने चाँद को देखा तो रात का रंग निखर गया
एक नूर आसमान में था एक दिल में उतर गया
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