Monday, May 18, 2026

Impromptu

 सबके अपने अपने रास्ते सबके अपने अपने ठिकाने

कुछ मंजिल पे पहुंचे कुछ अब भी हैं मुसाफिर पुराने

ज़िन्दगी की किताब में हर किसी के अलग अलग हैं फसाने

सफर में कुछ दूर चलकर क्यों खो जाते हैं जाने पहचाने



No comments:

Post a Comment

Impromptu