सबके अपने अपने रास्ते सबके अपने अपने ठिकाने
कुछ मंजिल पे पहुंचे कुछ अब भी हैं मुसाफिर पुराने
ज़िन्दगी की किताब में हर किसी के अलग अलग हैं फसाने
सफर में कुछ दूर चलकर क्यों खो जाते हैं जाने पहचाने
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