जज़्बात के हैं ये हालात कि कोई मुलाक़ात नहीं है
हर किसी में है कुछ बात पर कोई बात नहीं है
स्टेटस से खबर मिलती है फुर्सत नहीं मिलती
इनटच सभी है पर कोई साथ नहीं है
रिश्तों को भी अब वक़्त की मंजूरी चाहिए
बेवजह मिलने की वो सौगात नहीं है
कभी मजबूरियां कहीं जिम्मेदारियां हैं किसीकी
शिकवा किसी से नहीं बस पहले जैसी बात नहीं है
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