रुके रुके से कदम,रुक के बार बार चले
इज़हार करके तेरे दर से शर्मसार हो चले
नज़रे भी झुकी थी लफ्ज़ भी कांप रहे थे
दिल की बात कहते ही वो खामोश हो चले
रुके रुके कदम रुक के बार बार चले..
दिल रोक भी न पाया हजार सवाल लिए
मेरी खामोशियां का वो जवाब ले के चले
रुके रुके से कदम रुक के बार बार चले..
कुछ तो भीगी आंखें भी बयां कर रही थी
उन छलकते अश्कों से भी वो नजरें फेर चले
रुके रुके से कदम.. रुक के बार बार चले
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