Thursday, January 15, 2026

Imptomptu

 धुंध के कहीं किनारे नहीं होते

भटकते राही के सहारे नहीं होते

जो दिखता है अक्सर सच नहीं होता

लफ्ज़ हर बार इशारे नहीं होते

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