कभी कभी खैरो खबर भी जरूरी होती है
कभी जीकर कभी फिकर भी जरूरी होती है
माना फासले , दूरी, कभी कुछ मजबूरी होती है
दुआ सलामती में भी दूरी कुछ तो पूरी होती है
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कभी कभी खैरो खबर भी जरूरी होती है
कभी जीकर कभी फिकर भी जरूरी होती है
माना फासले , दूरी, कभी कुछ मजबूरी होती है
दुआ सलामती में भी दूरी कुछ तो पूरी होती है
दूर कहीं गांव में इक आशियां हो प्रकृति की छांव में
कुछ सोंधी कुछ गीली कुछ कच्ची मिटटी हो पांव में..
हर दिल में धंसा है तीर कोई
हर पांव में है जंजीर कोई
कौन बदल पाया तकदीर को
जब कमबख्त तकदीर ही है सोई
वक्त ने किया क्या हसीन सितम
हम रहे न हम तुम रहे न तुम
वो जो कहते थे ना बिछड़ेंगे हम
आज हो गए किसी और के सनम
वक्त ने किया क्या हसीन सितम ...
छीन के ले जाए किसमे था वो दम
वो खुद ही चले गए बस यही है गम..
वक्त ने किया क्या हसीन सितम