Friday, July 10, 2026

यादों की डायरी



यादों की डायरी कुछ यूँ सजा डाली है

 लम्हों और यादों की लड़ी बना डाली है


हर पन्ने पर एक मुस्कान बिठा रखी है

हर कोने में एक दास्ताँ छुपा रखी है


कुछ पल हँसी के कुछ आँखों की नमी के

कुछ रंग बचपन के कुछ किस्से ज़िंदगी के


न तारीख़ों का हिसाब न सालों की गिनती है

बस दिल को जो छू गए उन्हीं की बस्ती है


जब भी तन्हा दिल गुज़रे कल को बुलाता है

यादों का कोई पन्ना खुदबखुद खुल जाता है

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